अब मातृभाषा में पढ़ सकेंगे AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे कोर्स, IGNOU का बड़ा कदम; लाखों छात्रों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली: उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने बड़ा कदम उठाया है। इग्नू और ओडिशा स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के बीच हुए नए समझौते के बाद अब छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी समेत कई आधुनिक विषयों की पढ़ाई मातृभाषा में करने का अवसर मिल सकेगा।

इस पहल का उद्देश्य दूरस्थ और मुक्त शिक्षा प्रणाली को मजबूत करना तथा देश के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है। दोनों संस्थान मिलकर नए शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित करेंगे और उन्हें विभिन्न स्तरों पर संचालित करेंगे।

सर्टिफिकेट से लेकर शोध स्तर तक होंगे कार्यक्रम

समझौते के तहत सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर, कौशल विकास और शोध स्तर तक के कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। बदलती तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल ह्यूमैनिटीज, उद्यमिता और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

मातृभाषा में उपलब्ध होगी डिजिटल अध्ययन सामग्री

इस साझेदारी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा में डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से ई-कंटेंट तैयार करेंगे, ताकि भाषा किसी भी छात्र की शिक्षा में बाधा न बने।

ग्रामीण और दूरदराज के छात्रों को मिलेगा लाभ

नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद ओडिशा स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के अध्ययन केंद्रों के माध्यम से इग्नू के कई कार्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराए जा सकेंगे। इससे ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ इलाकों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच और आसान होगी।

तकनीक आधारित शिक्षा मॉडल पर रहेगा फोकस

इग्नू की कुलगुरु प्रो. उमा कंजीलाल ने कहा कि मुक्त और दूरस्थ शिक्षा का भविष्य तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था में निहित है। एआई आधारित लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, वर्चुअल क्लासरूम, ऑनलाइन मूल्यांकन और मोबाइल ऐप आधारित अध्ययन जैसे माध्यम आने वाले समय में शिक्षा के स्वरूप को बदलेंगे।

संयुक्त शोध और फैकल्टी प्रशिक्षण पर भी होगा काम

समझौते के तहत दोनों संस्थान डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, शिक्षकों के प्रशिक्षण, संयुक्त शोध परियोजनाओं, छात्र परामर्श सेवाओं और ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज के विकास पर भी मिलकर काम करेंगे। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

शिक्षा के नए दौर की शुरुआत

प्रो. उमा कंजीलाल के अनुसार यह साझेदारी केवल दो विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग नहीं है, बल्कि देश में डिजिटल, बहुभाषी और समावेशी उच्च शिक्षा के नए युग की शुरुआत है। इससे उन लाखों छात्रों को भी लाभ मिलेगा जो अब तक संसाधनों या भाषा संबंधी बाधाओं के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रहे हैं।

 

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